चैतीयो छैठ कर्ताकेँ संख्या बढ़ल, आइ संझियाअर्घ काइल पारण

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कुरमुर नागवंशी,
जनकपुरधाम–२२गते,अगहन । श्रद्धा, भक्ति आ सझिया सांस्कृतिक प्रतिविम्बके पहिचान लोक आस्थाके महापर्व‘छैठ’ केँ मानल जाइत छै । ई पावनि वर्षमे दू बेर मनाओल जाइत छै । एकबेर शरद्श्रतुके कातिक शुक्लपक्ष षष्टी तिथि दिन आ दोसर चैत्र शुक्ल षष्टी तिथिमे होइत छै ।
सम्पूर्ण मिथिला एवं किछु पहाडी जिलासभमे सेहो धार्मिक परम्परा अनुसार हर्षोल्लासके सँग छैठ पावनि मनाओल जाइत छै । मुदा छैठक भव्यता मिथिलानगरि जनकपुरधाममे अधिक रहैत छै ।
भोरका अर्घ आ संझिया अर्घ दिन जलायमे उगैत आ डूबैत सुरुजके अर्घ देखाक पुजन क’क’ पर्व समापन कएल जाइत छै । एहि हिसाबे ई पर्व दू दिन होइत छै । मुदा एहि पर्वक विधिविधिान नहाय खायस’ आरम्भ भजाइत छै ।
नहाय खाय, खरना, भोरका अर्घ, सझुंका अर्घ अ पारण क’क’ पबनैतिन पर्व समापन करैत छथि । जे पाँच दिवसीय सब मिलाक भजाइत छै । देशमे विशेष रुपस’ तराईक्षेत्रमे प्रमुखपर्वके रुपमे छैठ मनाओल जाइत छै ।
सत्य आ अहिंसाप्रति रुचि बढाबएबाला तथा सम्पूर्ण जीवप्रति साहानुभुति रखबालेल अभिप्रेरित करएबाला तराईवासीके महापर्व छैठ होइत छै । एहि महापर्वमे सबजाति,समुदाय एक्कहि स्थान–घाट पर सझिया रुपसँ छैठ मनबैत छै । जे एकर अपन साँस्कृतिक विशेषता छै । आपसी एकता सद्भाव आ सामजस्यताके प्रतिक रुपमे छैठ पर्वके देखल जाइत छै ।
एहिवेरुका चैती छैठ आइ बृहस्पतिदिनमे पड़ल छै । बृहस्पतिक संझुका अर्घ–पुजन आ शुक्रक भोरे भोरका अर्घ पुजन कयला पछाइत पारण करैत पर्व समापन होएत ।
सूर्यउपासना परम्पराके पद्धति मानलगेल संसारमे एहे एकटा एहन पवित्र पावनि छै जाहिमे अस्ताइत आ उगैत दूनु सूर्यके पूजा प्रत्यक्षरुपमे कएल जातिछै । एहि पावनिलेल आवश्यक समाग्रीके ओरिआओन पावनिक किछु दिन पहिनेसँ शुरु भऽ जाइत छै ।
चतुर्दशी दिनसँ व्रतालु एहि पावनिके मनायब काज शुरु करैत छैथ जे सप्तमी तिथिके भिन्सर उगैत सुर्यके अर्घ देखबैत पुजा करैत पर्व समापन कएल जाइत छै ।
छैठ अवसर पर मिथिलानगरि जनकपुरधाममे लोकके भीड़ बढिगेल छै । सम्पूर्ण मिथिलाञ्चल एवं नेपालमे जनकपुरधामके छैठ लोकप्रीय छै ! चर्चित छै तैँ लोकक हेंज लागब स्वाभाविक भगेल छै । चैतीछैठस’ बहुतबेसी कातिकी छैठ मनाबबालाकेँ संख्या रहैत छै ।
छैठ करब हेतु छैठ होबएबाला पोखरिसभमे घाटसभके अगते जनकपुरधाम उपमहानगर पालिकामे मादे स्थानीय संघसंस्था एवं समाज सुधारक अगुवा युवा सभकेँ समन्वयमे सर–सफाई कऽ विभिन्न प्रकारक टेन्ट लगा कऽ पोखरि–घाट सजाओल गेल छै ।
जनकपुरधामके छैठ देखबालेल हरेकवर्ष जकाँ अहूबेर विदेशी पर्यटकसभ जनकपुरधाम आएल छै ।
सनातनधर्म मानबाला समुदायके लेल लोकपर्व छैठके महत्व सभ पावनिस’ बेसी छै ।
छैठ व्रत कएलासँ दुस्ख दरिद्रताके अन्त होइत छै । पारिवारिक सदस्यकेँ देह–दशा,काया–समांग निक रहैत छै । ऐश्वर्य सुख वैभव प्राप्त होइत छै एहन जनविश्वास छै ।
महाभारत कथा अनुसार द्रोपदी सहित पाण्डवसभ अज्ञातवासमे वर्तमान नेपालक राजाबिराटके राज्य(बिराटनगर)मे रहल रहल छलाह । ओहि समयमे गुप्तवास सफलताक कामना सँग सूर्यदेव आ षष्टीका देवीकेँ आराधना कएने रहथिन्ह ।
वैदिक कालमे अत्री मुनिके अद्र्धाग्नि सती अनुसूया छैठ व्रत कएने छलीह । सूर्यपुराण अनुसार सर्वप्रथम अत्रिमुनिक पत्नी अनुसुया अटल सौभाग्य आ पति प्रेम प्राप्ति हेतु छैठव्रत कएने छलीह । तेकरबादस’ समाजमे छैठ मनाबके परम्परा विकसित भेल मान्यता छै ।
छैठ पावनिके पाछा धार्मिक मान्यताके संगहि वैज्ञानिक, ज्योतिष एवं आरोग्यस’ सम्बन्धि तथ्यसभ वैदिकग्रन्थ(शास्त्र–पुरण)सभमे उल्लेख भेटैत छै ।