शिक्षाके धारासायी बनाबके उपरस’निच्चाधैरके खेल,दूकक्षामे मात्र दू विद्यार्थी

२०७९ जेष्ठ २७, शुक्रबार १७:५९
सीमाञ्चल समदिया

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सीमाञ्चल समदिया,
जनकपुरधाम । सामुदायिक बिद्यालयके पठन पाठनमे आमजनता जे कनेको समृद्ध छै ओ अप्पन धीयापुताके पढाब नइ चाहैत छै । तेकर बहुत राश कारणसभ छै । जाहिमे सभस’ पैघ कारण छै राजनीति ! जाहि नीतिके ओजहस’ मास्टरसभ सेहो नेतघट्टा भरहल छै । मात्र अपन नोकरी जोगल रहे बिद्यार्थी पढ़ए, पास होए नइ होए कोनो माने मतलब नइ !

मास्टर जीसभके अपनो धीयापुता बेसी संस्थागत विद्यालय (नीजीए स्कूल)मे शिक्षित होइत छै । सामुदायिक (सरकारी) विद्यालयमे किए पढ़ौता एहन प्रबृति आम भगेल छै । तेकर एकटा टटका उदाहरण धनुषा जिलाके एकटा गाम पालिकाके नामी विद्यालयमे एकटा कक्षामे मात्र दूइएटा बिद्यार्थी पढ़लेल सामेल छै ।

जाहि तथ्यके उजागर जागरुक युवा फूलगेन महतो (फूलगेन मगही) सामाजिक सञ्जाल मादे कएलाह । धनुषा जिलाके पश्चिमी उतरी क्षेत्रकेँ गाउँ पालिका‘बटेश्वर’मे एकटा विद्यालकक्षामे दुइएटा विद्यार्थी अध्ययनरत् छै । देशके नमूना सामुदायिक विद्यालयकेँ गौरव प्राप्त कएने बटेश्वर गापा वार्ड नं.१ अन्तर्गते रहल लक्ष्मी माध्यमिक विद्यालयकेँ कक्षा दूमे मात्र दूटा विद्यार्थी अध्ययनरत् छैथ ।

सरकारी विद्यालयके दुराअवस्था अइस’बेसी आओर कि हएतै ! दू कक्षामे दू विद्यार्थी । एकटा बालिका एकटा बालक एवं मास्टर मात्र ! शिक्षाके व्यापारीकरण आ देशके नेतृत्व नेतघट्टासभके हातमे रहब सेहो छै । एम्हर आइए राजधानीस’ जारी समाचारमे शिक्षामन्त्री क्रिश्चियन धर्मावलम्बी मिशनकारी मादे विदेशीके एजेण्डा पाठ्यक्रममे समावेस क’क’ करबाक मोटगर रकम लेने समाचार आएल छै ।

कहल जाए कोनो देशके भविष्य शिक्षा पर टीकल रहैत छै । देशके भविष्य सेहो भावि सन्ततीपर टीकल रहैत छै । ओहे समाप्त करब षडयन्त्र भरहल छै । ‘ई’ ईश्वरके स्थान पर ‘ई’ स’ ईसा(ईसामसिह) बुझाब-पढाबके काज पाठ्यक्रम मादे भेल छै । एहन आओर आपति जनक पाठ्यक्रम तयार भेल छै । तैँ आब जनताके जागक चाही ।

अपन लगपासके विद्यालयमे अभिभावकसभकेँ बेर-कुबेर जाय चाही । विद्यालयके शिक्षक शिक्षिका, प्रधानाध्यापकसभस’ गप्पसप्प करैत विद्यालय बारे बुझब सुझब आ गलत सहीके बिरोध समर्थन करब काज करैत रहब आवश्यक छै ।

मुदा बिडम्बना सरकारी सामुदायिक विद्यालय एहिना छै, एहिना होइ छै कहिक पल्ला झारब काज करैत अएलास’ विभिन्न बिकृति आ विसंगति बढ़ैत जारहल छै । लोक अपन विद्यालयके सुधारइक व्यवस्थित करब दिश नइ जाक’ संस्थागत विद्यालय(नीजी विद्यालय)मे पठन-पाठन हेतु पठाबैत छै । ई भयावह अवस्था रोकल जाए चाही ।

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