बीच सडक परफिल्मी शैलीमे डेंगैयां

२०७९ कार्तिक २८, सोमबार २२:४८
सीमाञ्चल समदिया

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जनकपुरधाम । आइदिनमे दशबजेको ओनपोनमे दुःदायी मुदा रोचक घटना भेल । जे घटना हमरसभके समाज कोम्हर कोन दिशा जारहल छै जतह बाप बेटोधैरके लेहाज नइ । तेहन असभ्य समाजिक प्राणि भेल जारहल छै । जे अपने जन्मदाताके चौक चौराहा पर हुँहराबमे पाछा नइ पड़ैत छै ।

 

जनकपुरधाम गोपाल धर्मशाला लग श्यामके सैलुन छै । ओहि लगमे ठीक आगुकेँ दोकानमे टेपमे गीत बाइजरहल छल । ‘‘हेजी हे…

रामचन्द्र कह गये सीया से, ऐसा कल्युग आएगा,
हँस चुनेगा दाना-तिनका कौवा मोती खायेगा !
धरम भि होगा करम भि होगा लेकिंन शर्म नहीं होगा,
बात-बातमे माता-पिताको बेटा आँख दिखाएगा !! ’’

गीतक एतेक क्रम पुरा होइते छै कि तिब्रगतिमे ज ११ प ९६२९ नम्बरके एकटामोटर साइकिल आएल एवं फिल्मी शैलीजकाँ हँकैत आएल । एकटा अधबैस मुदा हेल्दी ब्यक्तिके आगुस’ घेरक मोटरसाइकिल ठामे खसा देलक, बिनु स्टेण्ड लगौनही छोइर देलक ।

 

मोसाके पाछा बैसल कसियाक कालर पकरलक । मोटरसाइकिल चलाबबाला ओ अधबैस समान्य कदकांतिके गोल-मटोल देहगर धुसगर ब्यक्तिकेँ हेलमेट ल’क’ दे दनादन पीट लागल,पीटाइ एहन जे दे हैलमेट माथेपर ।

 

लोकसभ कि भेलै कि भेलै करैत सड़कपर जुमल । मोसाके पाछा बैसल कसियाक कालर पकरलक । सडकपर भिड़ लाइग गेल । जाबत लोक केओ बचाओत ताबतधैरमे ओ अधबैस मनसाके माथ कपार स’ लेहु छुरछुराए लागल ।

 

तत्काले प्रहरी गाडि़ सेहो पुगल । गीत ताबतधैर दोकन्दार बन्न कदेने छल । प्रहरी अएलापर माइर खयलहा व्यक्ति बाजल हमर नाम ललेन्द्र चौधरी अइ । नगराइन नगरपालिकाके जटही हमर घर अइ । माइर मारने युवक बीस बाइवर्षके होएत । ओ बाजल हमर मायके मूँहकान फोइरक नाकस’ लेहु बहाक मारने छल । ओ अस्पतालमे छै आ ई १०/१५ दिनस’ घरस’ ई निप्ता छै ।

 

एतेक सुनलापर प्रहरी सबके अपन भ्यानमे रखलक आ जिल्ला प्रहरी कार्यालय दिस लगेल । मोसा चालक एवं पीटबाला आपसमे जिजा साला एवं पीटाइ खायबालास’ पिता-पुत्रके सम्बन्ध छल । से लोक बतौलक ।

 

एहितरहें दिनदहारे बीच सडकपर अपने रक्त सम्बन्धिके रक्त बहाक मारब समाजमे कि सन्देश छिरियाबके काज भेल छै । सोचनीय एवं चिन्तनीय विषय छै । लोक ठहक्का लगबैत एनाकहुँ मारलकैए । इ गल्त बात छै ।

 

गल्ती करएबाला बुझे हम गल्ती कएने छी तखन नइ ओहे बोध आब लोक मे नइ भरहल छै । तै समाजक अगुवासभमे जागरुकता आनल जाय चाही । दूटा युवा मे एकटा एनएमबी बैंकमे काज करैत छै, जे छौरा ललेन्द्रके जमाय हएता ओ जनतब देलगेल ।

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