काँच करचीस’ स्वागत करैत भोंट

२०७९ आश्विन २९, शनिबार १७:३६
सीमाञ्चल समदिया
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उपेन्द्रभगत नागवंशी,

जनकपुरधाम । आगामी अगहन-४ गते, देशमे आम निर्वाचन छै । नेपाल संघीय लोकतान्त्रिक देश कायम भेला पछाइत दोसरबेर संघ एवं प्रदेशके निर्वाचन होब जारहल छै । मुदा आनबेर जकाँ एहि बेरके निर्वाचनमे नइ ओहन जनउत्साह देखल जारहल छै ।

 

नइ कोनो उम्मेदवारके मूँहपर रोहानी ओहन अभैर रहल छै, जे ई सुनिश्चित होइक हम जीतबे करब ! तेहन जनपतियार अवस्था कोनो दल, ओकर नेता प्रति नइ देखा रहल छै ।

 

ओना अखनु निर्वाचनके एकमहिनास’ बेसीके समय शेष छै । तथापि लोकतन्त्रके महामेलामे दल ढोलकीयोसब दल बिमुख एवं जनता नेताबिमुख सन देखा रहल छै । अर्थराजनीतिस’ मतराजनीति जुइरगेल छै ।

 

लोकतन्त्र अएला परे बाजबाला लोक बाजस’ चुकैत नइ छै । जनअधिकारमुखी व्यवस्था होइतो दलीय आ नेतामुखी ब्यवस्था देशमे चलैत आएल छै । तै ओजहस’ लोक अपन बकार खुइलक नइ राइख पाबैत छै । कतहु कोनो नेता कोनो दलके लगुवा भगुवा बात लगा भिड़ाक झमेलामे नइ पाइर दए, ओहो भय समाजमे ब्याप्त रहैत छै ।

 

एहिबेरुका निर्वाचनमे स्वतन्त्र रुपमे निक लोकसभ प्रायः जिलामे उम्मेदवारी देने छै । मुदा निर्वाचन एतेक महग भगेल छै आ एहन जनप्रणालीके विकास समाजमे भगेल छै जे तलगर उम्मेदवार तलमलाइते रहि जाएत छै । तहिसभके देखला पर मतदाता एवं उम्मेदगर उम्मेदवार सेहो निराश छै !

 

आइ भोरे-भोरे धनुषा निर्वाचन क्षेत्र नं.३के एकटा पूर्वगाविस अध्यक्ष भेटल हुनक कहब छल—‘‘हमरा गाममे अखुनतोस’ नगरिक्ता-मतदाता परिचय पत्रके फोटोकोपी लेल जारहल छै । ओइके आधार पर एकहजार अखनु आ डेढ़ हजार भोंट दिन देतै । तेहन दलीय ठीकदारी शुरु भगेल छै ।’’ ई बात झुठ कि साँच ओ खोजक बिषय छै ।

 

तीन-चाइर वर्ष पछाइत भेटल अप्रवासी नेपाली मीत्रस’ भेल गप्पसपमे ओ कहलाह-‘‘ देशभैरमे जतेक राजनीतिक दल छै । ओहि दलसभके अगुवा एवं प्रमुख नेतासभकेँ जनता पारजित कए देत, तखनीएस’ देशमे आधा सुधार शुरु भजाएत । धोखोस’ ओ सभ जीतल त’ फेर धोकेबाजीके नवका-नवका नमुना देखाब लागत !’’

 

नेपाल सरकारके स्वामित्वमे रहल एकटा निकायके अध्यक्षस’ रिटायर भेल पैघ दलस’ सम्बद्ध बसद्धिजीवी लोकस’ चुनावके बारेमे पुछला पर ओ जे बाजल ओ आओर छगुन्ता लागबाला बात हमरालेल भेल ।

 

ओ महोदय कहलाह—‘‘अइबेर लोक अपना-अपना देहरी पर एकटा काँच करर्चीके सटका बनाक राखो ! घर-देहरी पर मतमाँग आबबाला कोनो दलके उम्मेदवार होए सोंझे दोदाइर दए, तब पुछौक अहाँके पक्षमे मतदान कथिला कएल जाए ?

 

देशमे बेरोजगारी बढ़ाबला आ बहु-बेटी-बेटाके मोह त्याइगक विदेश पठाबला ? ओकर कमोटी रकमके टेक्स पर अहाँके पोशाएला ! घरमे मरनी-हरनी भगेल अप्पन सम्पतियो बैंकमे राखब त’ लोन बन्न, जग्गह-जमिन बेचब त’ मालपोत-नापीमे किताकाट बन्न, महाजनीयो कर्जा उठाएब त’ मीटरब्याजीमे भोग भोगाब लेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानुनीराज चौपट कराब लेल ? अप्पन सर कुटुम्बके जगजियार कर लेल ?

 

करचीके माइर खाइते ऐरगेल त’ बुझु सम्हइर गेल ! परागेल त’ गेल । एहन नीति अख्तियारी लोक नइ करत ताबतधैर दल ओकर नेताके नीति आ चरित्र नइ सुधरत !’’ हुनक एहन सल्लाह सुइनक हमहुँ अचरजमे छी । एकटा पुराण पार्टीके बुझनीक लोक एहन मनसाय राखैत छै ।

 

एकर तातपर्य छै दल दलके नेताके ब्यवहारप्रति लोक रुष्ट छै । नेता जनमुखी नइ भ’क’ ब्यक्तिबादी बनल छै । जनताके मतस’ जनता पर राज करब देश बिगारु आ बेरोजगारी बढाउ, दलढोलकीया बनाउ आ सिस्टमेटिक सिस्टम सभकिछु धारासायी करु काज कएल जारहल छै ।

 

तेहनके पक्षमे किएक पैरवी कएल जाए ! मत देल जाय इृ अहम् प्रश्न छै । नीक योग्य जनहितकारी देश समाजके भल करबाला सभके उम्मेद पर सही उतरएबाला उम्मेदवारके पक्षमे मतदान कएल जाए आ ओहने उसासीके खोजल जाए चुनल जाय चाही एहिबेर तेकर दरकार छै ।

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