अन्तरिक्षके दुनियामे भारत नवअध्याय रचलक

चन्द्रयान-३ चान्दके दक्षिणीध्रुव पर सुरक्षित अवतरण कएलक

२०८० भाद्र ६, बुधबार २१:३३
सीमाञ्चल समदिया
Chandryan-3,simanchal.com

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Chandaryan-3.isro  चित्र एजेन्सी ।

 

जनकपुरधाम । मीत्रराष्ट्र भारत सेहो अन्तरिक्षके दुनियामे अपन डेग पसारमे सफल भेलाह । भारत चन्द्रमामे चन्द्रयान-३के नामस’ रोभर यान पठाक सुरक्षित अवतरण कराबमे एहिबेर भारतीय अतंरिक्ष विज्ञानिक सफल भेल छै ।

 

भारतके पठाओल चन्द्रयान-३ के रोभर चन्द्रमाके दक्षिणी ध्रुवमे जाक सफल अवतरण कएलक । जाहि हेतु भारत मात्रे नइ भारतक पड़ोसी देशके जनतासभ सेहो प्रसन्नता व्यक्त कए रहल छै ।

 

संसारभरि एहिकेँ चर्चा भरहल छै । तेकर मूल कारण छै चन्द्रमाके दक्षिणी ध्रुवमे यान पठाबबाला भारत मात्र अखनु एकटा असगर देश छै ।

 

२३ अगस्त,२०२३ईश्वी, २०८० साल भादव-६गते,बुधदिन नेपाली समय अनुसार साँझुक पहर ६ बाजिक १८ मिनटमे चन्द्रयान-३स’ ल्यान्डर चन्द्रमाके सतहमे सुरक्षित रुपमे पुगल छै । चन्द्रयान-३के एहेवर्ष बितल १४ जुलाईमे भारतके श्रीहरि कोटास’ प्रक्षेपण कएलगेल छल ।

 

चन्द्रयान-३ मे ‘अर्बिटर’, ‘ल्यान्डर’ आ ‘रोभर’ मीलाक तीनटा महत्वपूणर् भाग छै । ल्यान्डरके ‘बिक्रम’ नामाकरण कएललगेल छै । इन्डियन स्पेस रिसर्च अर्गनाइजेशन (इसरो) के संस्थापक बिक्रम साराबाईके नाम पर ल्यान्डरके नाम राखल गेल जनतब विभिन्न सञ्चार माध्यम मादे भेटल ।

 

विक्रम बोकने रोभरके नाम प्रज्ञान राखल गेल छै । प्रज्ञानके वजन २६ किलो कहलगेल छै । सन् २०१९ मे भारत अन्तरिक्षमे चन्द्रमाके सतह पर चन्द्रयान-२ पठौने छल । सुरक्षित यान पुगलाबादो ल्यान्डर अवतरण होबके क्रममा दुर्घटनामे पैरक सम्पर्क विच्छेद भगेल छल । मिशन असफल भगेल छल । मुदा अइ बेर सभ किछु ठीकठीक भरहल छै ।

 

एहिस’ पहिने अमेरिका, चीन आ तत्कालीन सोभियत संघ( अखनुका रुश) चन्द्रमा पर यान पठौने छल । मुदा ई सभ उल्लेखित देश चन्द्रमाके भूमध्यरेखा लगपासमे यान पठौने छल । अमेरिका चान्द पर कएबेर अन्तरिक्षयात्री पठाचुकल छै ।

 

चन्द्रमे पुगबाला चारिम देश नेपालके सबल परोसी देश भारत बनल छै । जाहिमे चन्द्रमाके दक्षिण ध्रुवमे पुगबाला पहिल देश भारत बनल छै । भारतक इसरोके विज्ञानिक सभकेँ वर्षोके मेहनत आ प्रयास सफल भेल छै । तैँ भारतीय नागरिक हर्षेत्सव मना रहल छै ।

 

प्रज्ञान रोभर आब चन्द्रमाके दक्षिणी ध्रुवके सतहके अध्ययन करत आ ओतहस’ रिपोट पठाबैत रहत । जाहिस’ बहुत राश जनतब विज्ञानिकसभकेँ भेटत । जाहिस’ संसार लाभानिवत होब सकत । अन्तरिक्षके दुनियामे एकटा नवअध्याय शुरु भेल मानल जासकैए ।

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